ग्रेनो वेस्ट में जीएसटी कंसल्टेंट से वसूली मामले में एक ओर चौंकाने वाली बात सामने आई है। आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों को पुलिस गंभीरता से नहीं लेती है। जीएसटी कंसल्टेंट से 29 लाख की वसूली मामले में पुलिस ने पर्याप्त सबूत न होने का हवाला देते हुए निपटारा कर दिया, जबकि घटना के बाद से पीड़ित खुद सीसीटीवी फुटेज को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को तक दिखा चुका था। अब पुलिस ने आनन—फानन में मुकदमा दर्ज कर घटना का खुलासा करने के लिए छह टीमें गाठित की है। इनमें क्राइम ब्रांच और एसओजी की टीमें भी शामिल हैं।
बता दें कि, सेक्टर—1 निवासी संदीप कुमार को 20 जुलाई को एस्पायर सोसाइटी के पास से जबरन उन्हीं की कार में बधंक बना लिया था। उनकी कार के सामने तीन आरोपियों ने अपनी गाड़ी लगाई थी। पुलिस की वर्दी पहने हुआ एक युवक गाड़ी से उतरा था। उसने संदीप को बताया था कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है, उन्हें साथ चलना होगा। बाद में तीनों आरोपी संदीप को उनकी कार से यमुना एक्सप्रेस—वे से आगरा की ओर ले जाने लगे। जहां उन्हें 29 लाख रुपये लेने के बाद छोड़ा गया। पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद से वह लगातार पुलिस के चक्कर काट रहे थे, लेकिन पुलिस घटना का खुलासा करने की जगह दबाने का प्रयास कर रही थी।
गंभीरता से नहीं ली आईजीआरएस की शिकायत
इस मामले में संदीप की पत्नी ने डॉयल—112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी थी। साथ ही पुलिस के बड़े अधिकारियों से भी शिकायत की गई। आरोप है कि उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हार थककर उन्होंने आईजीआरएस पर शिकायत की। आरोप है कि पुलिस ने पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कहते हुए आईजीआरएस का निस्तारण कर दिया। पूरे मामले की छानबीन करने की जहमत तक नहीं उठाई। आरोप है कि वह पहले ही घटना के संबंध में सीसीटीवी फुटेज पुलिस अधिकारियों को तक पहुंचा चुके थे।
पुलिस ने किया सीन री-क्रिएट
सेंट्रल जोन के डीसीपी के मुताबिक, पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का सीन री-क्रिएट किया है। पीड़ित को साथ लेकर पुलिस हर संभव स्थान पर गई। जहां—जहां आरोपी संदीप को लेकर गए थे। पुलिस उन्हीं सभी रास्तों पर पहुंची, जहां से उन्हें ले जाया गया था। साथ ही उन्हीं जगह पर पुलिस भी पहुंची, जहां आरोपी संदीप को लेकर रुके थे। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज और बयान के आधार पर सीन री-क्रिएशन के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान तीन आरोपियों के बारे में अहम सुराग हासिल हुए है। अब पुलिस वर्दी पहने हुए तीनों आरोपियों की तलाश मेंं जुट गई है। यह भी जांच की जा रही है कि वह विभाग में तैनात थे, या फिर फर्जी तरीके से पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया है।
