पंचकुला से डोनर हार्ट लेकर निकली टीम ने करीब 20 किलोमीटर का सफर महज 16 मिनट में पूरा किया। ग्रीन कॉरिडोर के जरिए डोनर हार्ट को फोर्टिस अस्पताल नोएडा पहुंचाया गया, जहां गंभीर हार्ट फेलियर से जूझ रहे 56 वर्षीय तपस कुमार डे का सफल हृदय प्रत्यारोपण किया गया। अस्पताल का दावा है कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट है। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की हालत स्थिर बताई गई है।
अस्पताल के चेयरमैन-कार्डियक साइंसेज डॉ. अजय कौल के नेतृत्व में मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने यह जटिल सर्जरी की। तपस कुमार डे पिछले कई वर्षों से गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थे। उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी और दवाओं से भी बीमारी नियंत्रित नहीं हो पा रही थी। चिकित्सकों के मुताबिक, समय पर हृदय प्रत्यारोपण नहीं होने पर उनकी जान को गंभीर खतरा था। उन्हें ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची में रखा गया था।
इसी बीच पंचकुला में एक डोनर हार्ट उपलब्ध होने की सूचना मिली। इसके बाद चुनौती थी कि सीमित समय में हृदय को नोएडा पहुंचाया जाए। अस्पताल की टीम ने NOTTO, पुलिस, प्रशासन और एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ समन्वय शुरू किया।
डोनर हार्ट को हवाई मार्ग से गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट लाया गया। यहां से उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस के साथ गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया। करीब 20 किलोमीटर का रास्ता सिर्फ 16 मिनट में तय कर हार्ट को अस्पताल पहुंचाया गया।
हार्ट पहुंचने से पहले ही ओटी तैयार था। डोनर हार्ट अस्पताल पहुंचते ही मरीज को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। खराब हो चुके हृदय को निकालकर नया हृदय प्रत्यारोपित किया गया। करीब एक घंटे में सर्जरी पूरी हुई। इसके बाद मरीज को विशेष निगरानी में रखा गया। तपस को गुर्दे की परेशानी, हाई ब्लड प्रेशर और गंभीर हृदय रोग का इतिहास भी था। इसलिए ट्रांसप्लांट के बाद विशेषज्ञों की टीम उनकी चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है।
डॉ. अजय कौल ने कहा कि मरीज का हृदय बेहद कमजोर हो चुका था और ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने का प्रमुख विकल्प था। डोनर हार्ट मिलने के बाद हर मिनट महत्वपूर्ण था। फोर्टिस के रीजनल डायरेक्टर मोहित सिंह ने पुलिस, प्रशासन, एयरपोर्ट अधिकारियों, NOTTO और डोनर परिवार का आभार जताया।
