ग्रेटर नोएडा के गामा-2 सेक्टर स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भक्ति और भाव की अनूठी छठा देखने को मिल रही है। व्यासपीठ से कथा वाचन कर रहे आचार्य विकास गौतम ने तीसरे दिन महाभारत प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।

साथ ही श्रद्धालुओं को बताया जब धर्म संकट में होता है, तब सुदर्शन चक्रधारी स्वयं रक्षक बनकर प्रकट होते हैं। हमारी जीवन नौका का संचालन करने वाला कोई साधारण नाविक नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण हैं। कथा में आज राजा परीक्षित के श्राप का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कैसे श्रृंगी ऋषि के श्राप से मृत्यु का समय निश्चित हुआ और कैसे मृत्यु के भय ने राजा परीक्षित को मोक्ष का मार्ग चुनने को प्रेरित किया।

इसके साथ ही कथा में श्री शुकदेव महाराज का आगमन हुआ। इस दिव्य प्रसंग ने सभा में उपस्थित जनसमूह को वैराग्य, भक्ति और आत्मज्ञान की गहराइयों से जोड़ा। हर श्रोता जैसे राजा परीक्षित बन गया और हर वाक्य जैसे शुकदेव की वाणी। कथा प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से प्रारंभ होती है और पूरे भाव व भक्तिभाव से सम्पन्न होती है।

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