मुंबई में आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सीजेपी प्रोटेस्ट पर जेन जी और जेन अल्फा से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में, विरोध भी आम सहमति बनाने का एक तरीका है। Gen-Z की शिकायत जायज है। देश की शिक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ करने की जरूरत है। ऐसा नहीं हो रहा है, इसलिए यह मुद्दा उठाया जा रहा है। गुरुवार को Gen-Z और Gen-अल्फा से एक घंटे तक चले संवाद में कहा कि पुरानी पीढ़ी से भी ज्यादा आज के युवा ज्यादा देशभक्त और ईमानदार है।

उन्होंने कहा- हमें उनकी बात सुननी चाहिए। उनसे बातचीत में कमी थी, इसीलिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ। इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस की 15वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में प्रोग्राम में 19 साल तक की उम्र के करीब दो हजार छात्र शामिल हुए। नीट पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर 36 दिन चले आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

भागवत ने कहा कि सुधार के लिए आंदोलन जरूरी है। आंदोलन करने पर युवाओं के मजबूरी के बीच सरकार की गलती रही। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले ही युवाओं से बात करनी थी। आंदोलन भी बातचीत का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि जब हम Gen-Z की उम्र में थे, तब बड़े जो कहते थे, हम मान लेते थे, सवाल नहीं करते थे। आज की Gen-Z सवाल करती है। उन्हें समाधान के साथ प्यार भी चाहिए। युवा आंदोलन नहीं करना चाहिए, यह तो हम नहीं कहेंगे। संविधान में लिखा है कि प्रदर्शन करना चाहिए, लेकिन यह कैसे करना है, उसे देखना चाहिए।

Gen-Z तकलीफ होने पर ही चिल्ला रहा है। आंदोलन सरकार के खिलाफ नहीं होता, बल्कि सिस्टम में सुधार के लिए जरुरी है। वह आंदोलन कर रहे है, तो वह एंटी-नेशनल नहीं है। वे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं। उनसे हमारा संबंध है। उन्हें हमारी बात समझनी चाहिए और हमें उनकी बात समझनी चाहिए। शिक्षा कमर्शियल बिजनेस नहीं है। ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए कि सरकार ही पूरी शिक्षा चलाए। हमें भी सहयोग करना होगा।

उन्होंने कहा कि लेकिन ऐसा सहमति बनाने के लिए किया जाना चाहिए, न कि बंटवारा करने के लिए। जहां तक Gen Z की बात है, हाल ही में जो हुआ। उनकी शिकायत जायज है। भारत की शिक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ करने की जरूरत है। ऐसा नहीं हो रहा है, इसलिए यह मुद्दा उठाया जा रहा है। प्रमुख ने कहा कि आज की नई पीढ़ी (जेन-जी और जेन-अल्फा) पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार और देशभक्त है।
मोहन भागवत ने कहा कि विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध करने और काम करने के कुछ तरीके होते हैं।

 

 

 

 

 

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