GST कंसल्टेंट को कार में बंधक बनाकर 29 लाख रुपये वसूलने के मामले में बिसरख कोतवाली पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दावा किया गया है कि आरोपी ड्राइवर ने खुद को दरोगा और फेरीवाले को जीएसटी अधिकारी बताकर पीड़ित से रकम वसूली थी। पुलिस के मुताबिक घटना में शामिल दो आरोपी अभी फरार है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 24 लाख 50 हजार रुपये नकद, साढ़े चार लाख रुपये सोने के आभूषण, पुलिस सब-इंस्पेक्टर की वर्दी, दिल्ली डिफेंस फोर्स की वर्दी और 7 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

लगभग ढाई साल पहले ग्रेनो वेस्ट में जीएसटी कंसल्टेंट से लूट की साजिश रची गई थी। सेंट्रल जोन के डीसीपी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि 20 जुलाई को एस्पायर सोसाइटी के पास से जीएसटी कंसल्टेंट संदीप कुमार को कार सवार लोगों ने अगवा कर लिया था। कार सवार आरोपियों ने खुद को पुलिस वाला और जीएसटी अधिकारी बताकर पीड़ित से 29 लाख रुपये की रकम वसूली थी। पुलिस ने बिजनौर निवासी मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशु, दिल्ली निवासी राजेश पवार, मथुरा निवासी विवेक शर्मा, देवरिया निवासी अंकित शाही और एटा निवासी अंशुल को गिरफ्तार किया है।

मुख्य आरोपी कशिश चौहान दिल्ली यशोभूमि में ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर की नौकरी करता है। कशिश चौहान का एक भाई और सलारपुर में फेरी लगाने वाला आरोपी अभी फरार है। कशिश चौहान इस घटना में खुद पुलिस का दरोगा बना, जबकि फेरी वाले को जीएसटी अधिकारी बनाया था। कशिश पूर्व में दिल्ली सिविल डिफेंस में भी काम कर चुका है। इसके पास सिविल डिफेंस की वर्दी भी है। इसके अलावा उसने यूपी पुलिस के दरोगा की वर्दी घटना को अंजाम देने के लिए सिलवाई थी। मुख्य आरोपी कशिश ने इस पूरे घटना की साजिश रची थी। पूरी योजना के साथ घटना को अंजाम दिया गया।

मुख्य आरोपी ने फेरी वाले को घटना में शामिल होने के लिए तीन लाख रुपये देने का लालच दिया था। इसके अलावा घटना में अन्य लोगों को भी हिस्सा देने का लालच दिया गया था। जीएसटी सलाहकार से 29 लाख की वसूली का मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशु घटना में फर्जी दरोगा बना था। पुलिस की वर्दी पहन उसने पूरी वारदात को अंजाम दिया। रकम से मौज मस्ती के लिए सबसे पहले वह बरेली प्रेमिका से मिलने पहुंचा। इसके बाद वह फ्लाइट से बेंगलुरु भी गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया है।

मौज मस्ती करने के लिए वह इस तरह की घटनाओं को अंजाम देता था। पहले भी वह कई घटनाएं कर चुका है, लेकिन पुलिस के पास अभी कोई शिकायत नहीं है। टोल पर भी वर्दी का रौब दिखाकर फ्री निकलता था। पुलिस को इस घटना का खुलासा करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस को पीड़ित के पालतू कुत्ते से अहम सुराग हाथ लगा और इसके बाद आरोपियों की पहचान की गई। पीड़ित संदीप अपने पालतू कुत्ते को सैलून ले जाने केे लिए घर से निकले थे। साथ ही उन्हें अपना लैपटॉप दफ्तर में देना था। बंधक बनाने के बाद कुत्ते को आरोपियों ने यमुना एक्सप्रेस—वे के जीरो पॉइंट से कुछ दूरी पर विवेक दूसरी कार से उसे वहां से ले गया था। अब पुलिस ने कुत्ते को देखकर कार को पहचान लिया और उसकेे बाद आरोपी तक पुलिस पहुंच गई।

पुलिस लगातार सीसीटीवी की फुटेज देख रही थी। पीड़ित का पालतू कुत्ता दिखाई दिया। इसी फुटेज से पुलिस को लीड मिली और पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पुलिस ने इस मामले में पीड़ित की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी विभाग को पत्र भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि पीड़ित की जीएसटी बिल में हेराफेरी की शिकायत है। पूर्व में भी पीड़ित को मुंबई पुलिस और जीएसटी से नोटिस आ चुके हैं। पुलिस इन सब की जांच कर रही है।

 

 

 

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