रूस-यूक्रेन युद्ध में हताहत हुए सैनिकों की संख्या को लेकर दोनों देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दावे अलग-अलग हैं। पश्चिमी खुफिया रिपोर्टों और थिंक टैंक (जैसे Center for Strategic and International Studies) के अनुसार, युद्ध में दोनों पक्षों के कुल मिलाकर 10 लाख से अधिक सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं, हालांकि सटीक और आधिकारिक आंकड़े गुप्त रखे गए है। इसी बीच एक बड़ा दावा किया जा रहा है। जिसमें सैनिकों से शादी करने वाली महिलाओं पर मुआवजे की राशि को हड़पने का आरोप है।
सीएनएन की खबर के मुताबिक, आरोप है कि युद्ध पर जाने वाले सैनिकों से महिलाओं ने जल्दबाजी में शादी की। ताकि उनकी उनकी मौत के बाद मिलने वाले सरकारी मुआवजा हासिल कर सके। बीते कुछ माह में इस तरह के मामले सामने आए है। जिसके बाद रूसी मीडिया और अधिकारी उन महिलाओं को ‘ब्लैक विडो’ तक कह रहे हैं।
रूस में कई ऐसे चौकानें वाले मामले सामने आए हैं, जिनमें सैनिकों के युद्ध पर जाने से पहले या फिर अस्पताल में घायल होने के बाद शादी की। पूरे मामले में अस्पताल और सेना तक की मिलीभगत के आरोप लगे हैं। सैन्य अस्पताल की नर्स पर आरोप लगा है कि इलाज के दौरान उसने पांच घायल सैनिकों से अलग-अलग समय पर शादी की। ताकि वह उनकी मौत के बाद मिलने वाले मुआवजे को हासिल कर सके। पूरे मामले में उसकी मिलीभगत सामने आने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया।
सेंट पीटर्सबर्ग निवासी मारिया को सेना ने बताया कि उनके 59 साल पिता यूरी की यूक्रेन युद्ध में गोली लगने से मौत हो गई। युद्ध पर भेजे जाने से दो दिन पहले पिता ने शादी करने की जानकारी लगी तो मारिया को बड़ा झटका लगा। जबकि मारिया ने कहा कि उसे महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। पिता से 22 साल छोटी होने के बाद भी कानूनी रूप से यूरी उनकी मां बन गई और सरकारी मुआवजे की हकदार हो गई।
बता दें कि, युद्ध में मारे जाने वाले एक सैनिक के परिवार को सरकार की तरफ से 62 लाख भारतीय रुपये यानी 50 लाख रूबल मिलते है। कई अन्य मानदेय और बीमा राशि जोड़ने पर यह ओर अधिक हो जाती है। आरोप है कि कुछ महिलाएं मुआवजा राशि के लिए सैनिकों से शादी करती है। मौत के बाद पूरा मुआवजे के अलावा उसके नाम अन्य संपत्ति को हड़प लेती है।
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने फरवरी 2022 में सेना में भर्ती होने वाले सैनिकों की शादी के नियम बदल दिए। युद्ध के दौरान इस प्रक्रिया में छूट दे दी गई। पिछले साल साइबेरिया के टॉम्स्क शहर के एक पॉडकास्ट में रूसी वकील और रियल स्टेट एजेंट मरीना ओरलोवा का बयान बहुत वायरल हुआ था। उन्होंने कहा था कि अगर फ्लैट खरीदना है तो किसी ऐसे सैनिक से शादी कर लो जो युद्ध पर जा रहा हो। उसकी मौत के बाद मिलने वाले पैसे से घर खरीद लेना। आजकल कई महिलाएं इसी तरह सस्ते फ्लैट खरीद रही हैं। यह एक बहुत अच्छा बिजनेस है।
रूसी कानून के मुताबिक, उस समय एंजेलिना उनकी कानूनी पत्नी थीं, इसलिए सरकारी मुआवजा पाने का अधिकार उन्हें मिल गया। इस पर जॉर्जी के परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने एंजेलिना को सबसे करीबी कानूनी रिश्तेदार का दर्जा रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद उन्हें मुआवजे का अधिकार नहीं मिला।
कुछ मामलों में आरोप सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं रहे। रूस के प्रिमोर्स्की क्षेत्र में जांच एजेंसियों ने एक वारंट ऑफिसर, एक सार्जेंट और सेना के एक अकाउंटेंट पर भी जांच शुरू की। आरोप है कि सेना के अधिकारी अनाथों और पुरुषों को ढूंढ़ते थे जिनका कोई करीबी रिश्तेदार नहीं होता था। उनसे शादी कराई जाती थी और फिर युद्ध के सबसे खतरनाक मोर्चों पर भेजा जाता था। मौत होने पर मुआवजे की रकम आपस में बांट लेते थे।
