ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ऐस एस्पायर सोसाइटी के पास से अगवा कर 29 लाख रुपये की लूट मामले में पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है। आरोप है कि आरोपियों को पकड़ने की जगह पुलिस उलटा जीएसटी कंसल्टेंट के कारोबार को प्रभावित कर रही है। उनके कारोबार से जुड़े लोगों और दस्तावेज खंगाल रही है। इसके उलट पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने में रुचि नहीं दिखा रही है। यहां तक के उनके क्लाइंट्स के मोबाइल नंबर तक मांगे जा रहे है। जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो सकता है।
पीड़ित ने बताया कि जीएसटी से जुड़े दस्तावेजों की पुलिस जांच कर रही है। साथ ही उनसे कारोबार के संबंध में जानकारियां जुटा रही है। आरोप है कि आरोयिों को गिरफ्तार करने की जगह पुलिस लगातार उनसे ही सवाल कर रही है। आरोप है कि पुलिस उनसे अब आईजीआरएस पर शिकायत के निस्तारण के बाद फीडबैक देने के नाम पर पुलिस की तरफ से ओटीपी मांगा जा रहा है। इसी बीच पुलिस ने दो संदिग्धों के फोटो दिखाकर पीड़ित से पहचान कराई है। पीड़ित ने उन्हें पहचान लिया है। आरोप है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तारी नहीं कर रही है। गिरफ्तारी न होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए जा रहे है।
अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे अधिकारी के मुताबिक, 29 लाख रुपये वसूली के मामले में शुरुआती जांच में सामने आया है कि फर्जी पुलिसकर्मी बनकर घटना को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने पीड़ित को दो संदिग्धों के फोटो दिखाए, जिन्हें उसने पहचान लिया है। पुलिस जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तार करने की बात कह रही है। पुलिस का कहना है कि वह आरोपियों के करीब तक पहुंच चुकी है।
अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सैय्यद अब्बास हैदर ने कहा कि अगर घटना में पुलिसकर्मी शामिल नहीं होते तो अब तक घटना का खुलासा कर दिया जाता है। उन्होंने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। यह घटना कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने घटना का जल्द खुलासा न करने पर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
